-आवेदन का आखिरी दिन सोमवार को
- स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे अभ्यर्थी
भोपाल। राज्य सेवा परीक्षा-2019 में आयुसीमा में संशोधन करने का आश्वासन प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग मंत्री गोविंद सिंह द्वारा देने के बावजूद मामले में अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है। मप्र लोक सेवा आयोग (पीएससी) ने शनिवार तक आयुसीमा की गणना का नया फॉर्मूला लागू नहीं किया। सोमवार (9 दिसंबर)को फॉर्म दाखिल करने की अंतिम तारीख है। इस बीच पीएससी दो बार पदों की संख्या में संशोधन कर चुका है। 14 नवंबर को राज्यसेवा परीक्षा की घोषणा करते हुए विज्ञापन जारी किया गया था। इसके मुताबिक परीक्षा में भागीदारी करने वाले उम्मीदवारों पर लागू अधिकतम आयुसीमा की गणना एक जनवरी 2020 को आधार तारीख मानते हुए होगी। आयु सीमा गणना के इस फॉर्मूले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, इस फॉर्मूले के चलते ऐसे उम्मीदवार जो अधिकतम आयुसीमा के मुहाने पर खड़े हैं, वे बाहर हो रहे हैं। परीक्षा 2019 की है ऐसे में अगले वर्ष यानी 2020 को आधार मानकर आयु निर्धारण करना भी सवाल पैदा कर रहा है। 2018 में राज्यसेवा की घोषणा नहीं हुई थी। इन सबके मद्देनजर प्रदेश के उम्मीदवारों ने मांग की थी कि इस स्थिति में तो अधिकतम आयुसीमा में एक वर्ष की राहत दी जाना चाहिए। बजाय इसके एक वर्ष बढ़ाकर उम्मीदवारों को बाहर किया जा रहा है। विरोध के बाद चार दिन पहले मंत्री गोविंद सिंह ने घोषणा की थी कि आयुसीमा की गणना एक जनवरी 2019 को आधार मानकर होगी। साथ ही अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखने की बात भी कही थी। उम्मीदवार तब से ही इंतजार कर रहे हैं कि पीएससी की ओर से राहत का ऐलान हो और वे आवेदन दाखिल कर सकें। नौ दिसंबर को फॉर्म दाखिल करने का आखिरी दिन। उम्मीदवार आशंकित हैं कि ऐसे में सोमवार को भी घोषणा हुई तो भी प्रदेशभर के हजारों उम्मीदवारों को कुछ घंटे ही फॉर्म दाखिल करने के लिए मिलेंगे। मप्र लोकसेवा आयोग के अधिकारियों का कहना है कि इस बारे में अब तक शासन का निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। आरक्षण से लेकर आयुसीमा और पदों का निर्धारण शासन से होता है। शासन आदेश भेजेगा तो आयुसीमा में राहत की घोषणा हो सकेगी। बहरहाल प्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री के आश्वासन के बावजूद राज्य सेवा परीक्षा के लिए उम्र सीमा संशोधन नहीं होने से अभ्यर्थी स्वयं को ठगा हुआ सा महसूस कर रहा है।
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