घर के बाहर लिखी होगी प्रदेश सरकार की हिस्सेदारी,अभी तक केन्द्र का होता था उल्लेख
भोपाल। प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बनने वाले आवासों का श्रेय अब प्रदेश की कांग्रेस सरकार भी लेंगी। अभी तक प्रधानमंत्री आवास के बाहर सिर्फ केन्द्र सरकार का उल्लेख होता था लेकिन अब प्रदेश सरकार के योगदान का भी उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसमें अब हितग्राहियों के घर के बाहर योजना का जो उल्लेख होता है, उसमें केंद्र के साथ-साथ प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही 40 फीसदी राशि का जिक्र भी होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है, क्योंकि योजना में 40 फीसदी राशि राज्य सरकार के लगाने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में यह संदेश है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह सौगात दी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास बनाने वाले राज्यों में मध्यप्रदेश अव्वल रहा है। इसको लेकर तारीफ भी होती है पर जब ब्रांडिंग की बात आती है तो केंद्र सरकार पूरा श्रेय ले जाती है। भाजपा भी इस योजना को इस तरह प्रचारित करती है। यह मुद्दा मुख्यमंत्री कमलनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कई बार उठ चुका है। अनौपचारिक चर्चा में भी मंत्री यह बात उठा चुके हैं कि जब राज्य सरकार योजना में 40 फीसदी राशि लगाती है और जमीन भी देती है तो फिर इसका श्रेय क्यों न लिया। इस पर मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति भी है। इसे देखते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने अधिकारियों को नोटशीट लिखकर निर्देश दिए थे कि योजना में राज्य सरकार के हिस्से का भी हितग्राही के घर के बाहर होने वाली सूचना में उल्लेख होना चाहिए। पटेल का कहना है कि आवास बनाने जमीन राज्य सरकार ने दी है। इसके लिए बाकायदा पट्टे बांटे गए हैं।
आवास बनाने की लागत एक लाख 20 हजार रुपए में 40 प्रतिशत राशि प्रदेश के खजाने से दी जाती है। इसके अलावा आबादी क्षेत्र में विकास कार्य भी राज्य सरकार ही कराती है। अब योजना की सूचना में इसका उल्लेख भी किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को यह साफ रहे कि योजना अकेले केंद्र सरकार की नहीं है। मंत्री के निर्देश को मद्देनजर रखते हुए विभागीय अधिकारी दिलीप कुमार ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि अब हितग्राही के घर के बाहर जो सूचना लिखी जाए, उसमें प्रदेश की हिस्सेदारी भी दर्ज की जाए। केंद्र सरकार की प्रदेश में जितनी भी योजनाएं संचालित हो रही हैं, उसमें नए फार्मूले के तहत राज्य की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। यह पहले किसी में 25 तो किसी में 10 प्रतिशत हुआ करती थी। राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाए जाने पर 15वें वित्त आयोग के सामने प्रदेश सरकार ने आपत्ति भी दर्ज कराई है। दरअसल, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद राज्यों के पास कर लगाने के अधिकार बेहद सीमित हो गए हैं। इसके कारण केंद्र के इस कदम से राज्यों का बजट गड़बड़ा गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में 2011 की जनगणना के हिसाब से 47 लाख परिवार ऐसे चिन्हित किए गए थे, जिनके योजना में आवास बनने थे। इसमें से अपात्रों को बाहर करने पर 31 लाख पात्र हितग्राही बचे। केंद्र सरकार ने 18 लाख प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास स्वीकृत किए हैं। इनमें से 13 लाख 44 हजार बन चुके हैं।
अब प्रधानमंत्री आवास का श्रेय राज्य सरकार भी लेगी